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देखिए वीडियो, न्यूज प्राइम 18 का बड़ा खुलासा: शातिर नसरीन अशरफी के जालसाजी और सरकारी फाइलों की चोरी का भंडाफोड़ अगस्त 2025 में बिना सील-साइन के जो कागज किए थे वायरल, अब फरवरी 2026 में उन्हीं पर रातों-रात लग गई मुहर!

राजन सिंह चौहान

चिरमिरी एमसीबी। न्यूज प्राइम 18 की खोजी रिपोर्ट ने एक बार फिर शातिर महिला नसरीन अशरफी के दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं। खुद को बचाने के लिए नसरीन अब पुलिस विभाग के गोपनीय दस्तावेजों के साथ खिलवाड़ और जालसाजी पर उतर आई है। चौंकाने वाली बात यह है कि जो दस्तावेज कुछ महीनों पहले तक महज कोरी फोटोकॉपी थे, अब उन्हें जिलाबदर की फर्जी खबरों की आड़ में ‘सत्यापित’ दिखाकर पेश किया जा रहा है।

क्या है पूरा मामला?

अगस्त 2025 में नसरीन अशरफी ने पत्रकार संजीव सिंह को व्हाट्सएप पर कुछ गोपनीय सरकारी दस्तावेज भेजे थे। उस समय उन दस्तावेजों पर न तो थाने की कोई सील थी और न ही किसी जिम्मेदार अधिकारी के हस्ताक्षर। न्यूज प्राइम 18 द्वारा इस षड्यंत्र का पर्दाफाश करते ही आरोपी महिला ने नया पैंतरा बदला। अब फरवरी 2026 में नौ महीने बाद, उन्हीं पुराने दस्तावेजों पर संदिग्ध तरीके से मुहर और साइन लगाकर उन्हें सोशल मीडिया पर पोस्ट किया गया है।

RTI कानून की सरेआम धज्जियां

सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI) 2005 के अनुसार, किसी भी थाने का गोपनीय दस्तावेज तीसरे पक्ष (Third Party) को बिना संबंधित व्यक्ति की सहमति के नहीं दिया जा सकता। ऐसे में सवाल उठता है कि:

 * नसरीन अशरफी को थाने की गोपनीय फाइलें आखिर उपलब्ध कौन करा रहा है?

 * अगस्त 2025 में जो कागज बिना मुहर के थे, उन पर अब मुहर कहां से आई? क्या यह थाने के भीतर की मिलीभगत है या फर्जी मुहरों का खेल?

> “नसरीन अशरफी ने पत्रकार संजीव सिंह से बातचीत में खुद स्वीकार किया था कि उसने शिकायतें और FIR षड्यंत्र के तहत करवाई हैं। अब जिलाबदर की झूठी खबर फैलाकर वह अपनी पुरानी चोरी और जालसाजी को ढंकने की कोशिश कर रही है।” – संपादकीय टीम, न्यूज प्राइम 18

जांच के घेरे में पुलिस प्रशासन

यह मामला केवल एक महिला की शातिराना हरकत तक सीमित नहीं है, बल्कि पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवालिया निशान लगाता है। बिना थाना प्रभारी की सहमति के गोपनीय दस्तावेज बाहर जाना ‘सरकारी गोपनीयता अधिनियम’ का उल्लंघन है। आशंका जताई जा रही है कि अपनी चोरी पकड़े जाने के डर से नसरीन ने अब फर्जी तरीके से मुहरें लगवाकर प्रशासन को गुमराह करने का नया षड्यंत्र रचा है।

प्रमुख बिंदु जो खड़े करते हैं संदेह:

 * व्हाट्सएप चैट का सबूत: 28 अगस्त 2025 को नसरीन ने स्वयं स्वीकार किया कि दस्तावेज उसके पास हैं, जो उस समय असत्यापित थे।

 * समय का खेल: 9 महीने तक खामोश रहने के बाद अचानक ‘सत्यापित’ दस्तावेजों का प्रकट होना किसी बड़ी साजिश की ओर इशारा करता है।

 * कानूनी उल्लंघन: बिना प्रार्थी की अनुमति के गोपनीय जानकारी सार्वजनिक करना दंडनीय अपराध है।

न्यूज प्राइम 18 इस पूरे मामले की तह तक जाएगा। जल्द ही इस मामले में संलिप्त अन्य चेहरों का भी खुलासा किया जाएगा।

देखिए वीडियो

 

 

 

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