विशेष रिपोर्ट: न्याय की गुहार लगाने वाली महिला से बिजुरी थाने में ‘गुंडई’, SCEL फोरमैन को बचाने का गंभीर आरोप


बिजुरी (अनूपपुर/MCB)। जहां एक तरफ अनूपपुर कोतवाली पुलिस ने शादी का झांसा दे कर महिला का शारीरीक शोषण कर रहे आरोपी को जेल दाखिल करती है वहीं दूसरी तरफ बिजुरी थाना की पुलिस ने 3 दिसंबर 2025 की रात ऐसे ही एक मामले में जहां कथित तौर पर शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाने वाले एक SCEL झगड़ाखांड फोरमैन को बचाने के लिए पुलिस ने न केवल शिकायतकर्ता महिला और उसके साथियों को प्रताड़ित किया,बल्कि पत्रकारों के साथ भी दुर्व्यवहार कर सबूतों को नष्ट करने का प्रयास किया।
घटनाक्रम: 3 दिसंबर 2025 (शाम 7 बजे से रात 12 बजे तक)
एक पीड़ित महिला, जिसने SCEL झगड़ाखांड में पदस्थ एक फोरमैन (अधिकारी) पर शादी का झांसा देकर लगातार शारीरिक संबंध बनाने और बाद में इनकार करने का आरोप लगाया है,अपने साथियों के साथ रिपोर्ट दर्ज कराने बिजुरी थाना जा रही थी।
पत्रकार भी नहीं बख्शे गए
घटना के दौरान, दो पत्रकार जो प्रार्थी की शिकायत पर बाइट और विजुअल रिकॉर्ड कर चुके थे, वे भी थाने पहुंचे।
प्रताड़ना का विरोध करने पर थाना प्रभारी विकास सिंह और पुलिसकर्मियों ने पत्रकारों के साथ गाली-गलौच की।
पत्रकारों के मोबाइल फोन भी छीन लिए गए और उनके द्वारा रिकॉर्ड किए गए प्रार्थी के बाइट और विजुअल वीडियो डिलीट कर दिए गए।
इसके बाद,थाना प्रभारी विकास सिंह ने कथित तौर पर पत्रकारों पर यह दबाव डाला कि वे लिखकर दें कि “महिला की शिकायत झूठी पाई गई“। दबाव में पत्रकारों ने ऐसा लिखकर दिया और उन्हें जाने दिया गया।
थाना प्रभारी पर गंभीर धमकी देने का आरोप
थाना प्रभारी विकास सिंह के सामने जब प्रार्थी महिला और उसके साथियों को पेश किया गया, तो उन पर कथित तौर पर शिकायत वापस लेने और ‘कुछ पैसा लेने’ का दबाव बनाया गया।
थाना प्रभारी विकास सिंह (कथित): “तुम कुछ पैसा ले लो और अपनी शिकायत वापस ले लो… नहीं तो तुम सभी को आरोपी से शिकायत कराकर ब्लैकमेल और हनी ट्रैप के केस में फंसाकर जेल भेज देंगे।”
रफा-दफा’ हुआ मामला
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पुलिस ने पत्रकारों को जाने देने के बाद, पूरी रात मामले को रफा-दफा करने में लगा दिया। फोरमैन से भारी रिश्वत लेने के बाद, शिकायतकर्ता महिला के मोबाइल से सबूत डिलीट कर दिए गए और सभी को बिना किसी कार्यवाही के रात में ही छोड़ दिया गया।
बिजुरी थाने में लगे सभी सीसीटीवी कैमरे चालू थे और माना जा रहा है कि यह पूरी घटना CCTV फुटेज में कैद हुई होगी।
कानून के रखवाले ही बने ‘गुंडे’
यह घटना पुलिस प्रशासन पर कई गंभीर प्रश्न उठाती है:
कानून का उल्लंघन: क्या एक SCEL अधिकारी (दूसरे जिले का) को बचाने के लिए थाना प्रभारी ने रिश्वत ली और अपने पद का दुरुपयोग किया?
मानवाधिकार हनन: बिना महिला पुलिस के,प्रार्थी महिला को मारपीट और थर्ड डिग्री का इस्तेमाल कर प्रताड़ित करना किस कानून के तहत उचित है?
क्या महिलाओं को रात में थाने में रखा जा सकता है? पूरी घटना थाने के कैमरे में है कैद?
न्याय में बाधा: सबूतों को जबरन डिलीट करना और पत्रकारों पर दबाव डालकर झूठा बयान लिखवाना न्याय की प्रक्रिया का सीधा उल्लंघन है।
अब SP के संज्ञान का इंतजार
अब जिले के तेजतर्रार पुलिस अधीक्षक मोती उर रहमान जी के संज्ञान में यह पूरा मामला आना शेष है। यह देखने वाली बात होगी कि SP महोदय इस अत्यंत गंभीर दुर्व्यवहार, सबूतों को नष्ट करने और कानूनी कदाचार के आरोपों पर थाना प्रभारी विकास सिंह समेत शामिल सभी सिविल ड्रेस के पुलिसकर्मियों के विरुद्ध किस प्रकार की सख्त और निर्णायक कार्यवाही करते हैं। न्याय के लिए लड़ने वाली महिला और पत्रकारों के साथ हुए इस अन्याय पर जिले की जनता की नजरें टिकी हुई हैं।



